मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इतिहास से छेड़छाड़ कर रही बिहार सरकार: आश्रिति शर्मा

216

पटनाः भाजपा नेत्री आश्रिति शर्मा ने बिहार सरकार और उसके मुखिया नीतीश कुमार पर मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। शर्मा का यह आरोप शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मोहम्मद युनूस को बिहार का प्रथम प्रधानमंत्री बताते हुए उनके जन्म दिवस पर राजकीय जयंती समारोह मनाए जाने को लेकर आया है। शर्मा ने इसे ’बिहार केसरी’ श्री कृष्ण सिंह का अपमान बताया है और कहा है कि बिहार सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इतिहास के साथ छेडछाड कर रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इतिहास में मोहम्मद युनूस का रोल राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल

भाजपा नेत्री ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इतिहास में मोहम्मद युनूस का जो रोल रहा है उसे राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल बताया गया है, तो क्या ऐसे व्यक्ति का राजकीय समारोह मनाया जाना चाहिए। अब तक इतिहास में यही पढ़ाया जाता रहा है कि बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह जी बिहार के प्रथम प्रधानमंत्री (पहले मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था) थे। अब मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नीतीश सरकार ने ऐसी बात करनी प्रारंभ कर दी है। श्रीकृष्ण सिंह को प्रथम प्रधानमंत्री नहीं मानकर किसी अन्य को प्रधानमंत्री के रूप में संबोधित करना इतिहास के साथ छेडछाड है।

मोहम्मद युनूस को बिहार का प्रथम प्रधानमंत्री बताना ’बिहार केसरी’ श्रीकृष्ण सिंह का अपमान

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह श्रीकृष्ण सिंह के साथ पुरे देश और प्रदेश का अपमान है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सरकार ने तथ्यों के साथ छेडछाड की है। उन्होंने बिहार विधानसभा द्वारा प्रकाशित और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राधा नंदन झा द्वारा लिखित पुस्तक सहित कई पुस्तकों दिखाते हुए कहा कि इस पुसतक को पढ लें, सब कुछ सप्ष्ट हो जाएगा।

आश्रिति शर्मा ने सवाल करते हुए कहा कि भाजपा जानना चाहती है कि इन तथ्यों को क्यों तोड़ा मरोड़ा जा रहा है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण और वोट के लिए इस हद तक गिरना यह श्री कृष्ण सिंह जी का अपमान है और राष्ट्रीय आंदोलन का अपमान है।

उन्होंने इतिहास की चर्चा करते हुए बताया कि 1937 में चुनाव हुआ था उसमें राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस को बिहार में बहुमत आया। कांग्रेस ने उस समय ब्रिटिश सरकार के समक्ष कुछ शर्ते रखते हुए स्पष्टीकरण मांगी, तभी सरकार में शामिल होने की बात की। शर्ते नहीं मानने पर कांग्रेस ने किसी राज्य में सरकार नहीं बनाई। उसी दौरान अंग्रेजों ने मुस्लिम समुदाय के नेता युनूस केा फूट डालो नीति के तहत  शपथ दिलवा दी। यही कारण है कि कभी उनकी मानयता नहीं दी गई।

उन्होने कहा कि इस दौरान  आंदोलन भी हुए आौर जेपी भी जेल गए। खुद को आज जे पी का  चेला मानने वाले नीतीश कुमार और लालू प्रसाद युनुस की जयंती पर राजकीय समारोह आयोजित कर रहे।

 उन्होंने कहा कि युनूस  को खुद बिहार सरकार भी अब तक  प्रधानमंत्री नहीं मानती रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब उन्हें बिहार का प्रथम प्रधानमंत्री कहा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 21 जून 1937 को फिर स्ष्टीकरण दिया गया तब 20 जुलाई को श्रीकृष्ण सिंह ने शपथ ली।

उन्होंने कहा कि सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत वोटों के लिए इस तरह गिर गई है कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है। राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा से कटे लोगों को प्रतिष्ठित कर रही है। उन्होंने सरकार से युनूस की जयंती पर राजकीय समारोह बंद करने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि पहले से जारी प्रक्रिया जिसमें श्री कृष्ण सिंह को प्रथम प्रधानमंत्री माना गया है, उसे जारी रखने की बात कही।

Previous article‘मन की बात’ का 100वां एपिसोड-पीएम मोदी की खास बातें
Next articleनए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को,बहिष्कार के मुड में विपक्ष